महीने का आसनअप्रैल 2025

Warrior II

Virabhadrasana II

Warrior II illustration

वॉरियर II के साथ शक्ति बनाएँ और अपना ध्यान केंद्रित करें — यह खुलेपन, सहनशक्ति और स्थिर उपस्थिति का एक शक्तिशाली आसन है।

Warrior II Pose, या संस्कृत में Virabhadrasana II, योग के सबसे प्रतिष्ठित खड़े आसनों में से एक है। यह शक्ति, स्थिरता और एकाग्रता को विकसित करता है, साथ ही कूल्हों और छाती को खोलता है।

कैसे करें

  1. खड़े होकर शुरू करें: पर्वत आसन (Mountain Pose) से शुरू करें। अपने पैरों को लगभग 4 फीट की दूरी पर रखें या कूदें, हाथों को फर्श के समानांतर किनारों की ओर फैलाएँ, हथेलियाँ नीचे की ओर हों।
  2. अपने पैरों को मोड़ें: अपने दाएँ पैर को 90 डिग्री पर बाहर की ओर और बाएँ पैर को थोड़ा अंदर की ओर घुमाएँ। आपकी दाएँ एड़ी आपके बाएँ पैर के मेहराब के साथ संरेखित होनी चाहिए।
  3. अपने सामने के घुटने को मोड़ें: साँस छोड़ते हुए, अपने दाएँ घुटने को अपने दाएँ टखने के ऊपर मोड़ें, जिससे जाँघ फर्श के समानांतर जितना संभव हो उतनी करीब आ जाए। अपने घुटने को अपनी दूसरी उँगली के साथ संरेखित रखें।
  4. अपनी बाहों को फैलाएँ: दोनों बाहों से मजबूती से पहुँचें, कंधों को कूल्हों के ऊपर ढेर रखें। उँगलियों से उँगलियों तक ऊर्जा के विस्तार को महसूस करें।
  5. अपनी दृष्टि मोड़ें: अपना सिर दाएँ घुमाएँ और अपनी दाएँ उँगलियों पर दृष्टि डालें। अपनी ठोड़ी को फर्श के समानांतर रखें।
  6. अपने कोर को सक्रिय करें: अपनी नाभि को धीरे से अपनी रीढ़ की ओर खींचें। अपने धड़ को अपने पैरों के बीच केंद्रित रखें — आगे की ओर न झुकें।
  7. नीचे की ओर जड़ें: अपने पिछले पैर के बाहरी किनारे से दृढ़ता से दबाएँ। दोनों पैरों के माध्यम से पृथ्वी से अपने जुड़ाव को महसूस करें।
  8. 5-10 साँसों तक रुकें, फिर अपना सामने का पैर सीधा करें और पक्ष बदलें।

लाभ

  • पैरों, टखनों और पैरों को मजबूत करता है
  • कूल्हों, छाती और कंधों को खोलता है
  • सहनशक्ति और सहनशीलता बनाता है
  • एकाग्रता और ध्यान में सुधार करता है
  • पेट के अंगों को उत्तेजित करता है

वॉरियर II हमें एक ही समय में मजबूती से खड़े होना और खुला रहना सिखाता है — मैट पर और मैट से बाहर दोनों जगह एक शक्तिशाली संयोजन।

नमस्ते,
Andrea Borghi
Green Yoga Inc

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